Delhi Startup Policy: केवल योजनाएं घोषित करने से नहीं बदलेगी तस्वीर, युवाओं को धरातल पर चाहिए अवसर: महेंद्र भास्कर
नई दिल्ली (रविंद्र कुमार)। दिल्ली में स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए गो-दिल्ली फाउंडेशन के गठन को कैबिनेट की मंजूरी मिलने और इसके लिए 50 करोड़ रुपये का शुरुआती बजट निर्धारित किए जाने के बाद सरकार की इस पहल के वास्तविक परिणामों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार का कहना है कि इस फाउंडेशन के माध्यम से युवाओं, स्टार्टअप संचालकों और उद्यमियों को तकनीकी सहायता, उत्पाद निर्माण, परीक्षण सुविधाओं और निवेशकों तक पहुंच बनाने में मदद दी जाएगी। हालांकि, कांग्रेस ने सरकार की इस पहल के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस का कहना है कि केवल योजनाओं की घोषणा करने और बजट निर्धारित करने से युवाओं की समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता, बल्कि सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि योजनाओं का लाभ वास्तव में जरूरतमंद युवाओं तक पहुंचे और उसके परिणाम जमीन पर दिखाई दें।
कांग्रेस करोलबाग जिला अध्यक्ष महेंद्र भास्कर ने इस मुद्दे पर दिल्ली सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि योजनाएं बनाना और उनकी घोषणा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें प्रभावी तरीके से लागू करना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल आश्वासन देने या आकर्षक योजनाओं की जानकारी देने से उनके सामने मौजूद चुनौतियां दूर नहीं होंगी। वास्तविक बदलाव तभी आएगा, जब युवाओं को आर्थिक सहायता, तकनीकी प्रशिक्षण, विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और रोजगार के ठोस अवसर मिलेंगे। महेंद्र भास्कर ने कहा कि आज दिल्ली में बड़ी संख्या में युवा अपना कारोबार शुरू करना चाहते हैं। कई युवाओं के पास नए विचार, तकनीकी जानकारी और मेहनत करने की क्षमता है, लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी, जटिल सरकारी प्रक्रियाओं और बाजार तक पहुंच न होने के कारण वे अपने प्रयासों को सफल व्यवसाय में नहीं बदल पाते। ऐसे में केवल एक नया फाउंडेशन बनाने या 50 करोड़ रुपये के शुरुआती बजट की घोषणा करने से इन समस्याओं का समाधान नहीं हो जाएगा।
महेंद्र भास्कर ने कहा कि सरकार को गो-दिल्ली फाउंडेशन के कामकाज और इसके तहत मिलने वाली सहायता को लेकर स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। सरकार को बताना चाहिए कि 50 करोड़ रुपये के शुरुआती बजट का इस्तेमाल किन-किन मदों में किया जाएगा, लाभार्थियों का चयन किन मानदंडों के आधार पर होगा और युवाओं को सहायता प्राप्त करने के लिए किस प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आवेदन प्रक्रिया सरल और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि सीमित संसाधनों वाले युवाओं को भी योजना का लाभ लेने में परेशानी न हो। इसके साथ ही सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि इस योजना के तहत कितने स्टार्टअप को सहायता देने का लक्ष्य रखा गया है, इससे कितने नए रोजगार पैदा करने की उम्मीद है और कितने उद्यमों को अपने उत्पाद बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। उनके अनुसार, जब तक ऐसे स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित नहीं किए जाते और उनकी प्रगति का आकलन नहीं होता, तब तक योजना की वास्तविक सफलता का मूल्यांकन करना मुश्किल रहेगा।
कांग्रेस नेता ने कहा कि स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए केवल तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। युवाओं को कारोबार शुरू करने के लिए आसान ऋण, निवेश की उपलब्धता, आवश्यक सरकारी अनुमतियां और अपने उत्पादों की बिक्री के लिए उपयुक्त बाजार भी चाहिए। किसी भी नए उद्यम को सफल बनाने के लिए शुरुआती पूंजी के साथ-साथ सही व्यावसायिक सलाह, ग्राहकों तक पहुंच और कारोबार को आगे बढ़ाने के अवसर आवश्यक होते हैं। यदि किसी युवा के पास उपयोगी उत्पाद या नई तकनीक विकसित करने का विचार है, लेकिन उसे उत्पादन शुरू करने, उत्पाद का परीक्षण कराने या बाजार में अपनी जगह बनाने के लिए आवश्यक सहायता नहीं मिलती, तो उसका प्रयास अधूरा रह सकता है। महेंद्र भास्कर ने कहा कि सरकार को इन बुनियादी जरूरतों पर विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि गो-दिल्ली फाउंडेशन केवल तकनीकी सहायता देने वाली व्यवस्था बनकर न रह जाए, बल्कि युवाओं को अपना कारोबार स्थापित करने और उसे आगे बढ़ाने में व्यावहारिक सहयोग भी दे सके।
महेंद्र भास्कर ने यह भी कहा कि किसी योजना की सफलता का आकलन केवल उसके बजट, घोषणाओं या प्रचार के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। यह देखना जरूरी है कि योजना से कितने लोगों को वास्तविक लाभ मिला, कितने युवाओं ने अपना व्यवसाय शुरू किया और कितने स्टार्टअप आर्थिक रूप से मजबूत होकर आगे बढ़ सके। उन्होंने कहा कि सरकार को सहायता प्राप्त करने वाले युवाओं और उद्यमियों की संख्या, रोजगार सृजन तथा कारोबार के विस्तार से संबंधित परिणामों की नियमित जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। इससे योजना की पारदर्शिता बढ़ेगी और यह पता चल सकेगा कि निर्धारित बजट का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है। उनके मुताबिक, यदि लाभार्थियों के चयन से लेकर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने तक की प्रक्रिया स्पष्ट होगी और उसकी नियमित समीक्षा की जाएगी, तो युवाओं का भरोसा भी बढ़ेगा। उन्होंने जोर दिया कि योजना का लाभ केवल बड़े संस्थानों या पहले से स्थापित उद्यमियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि छोटे स्तर पर काम शुरू करने वाले युवाओं को भी आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने कहा कि दिल्ली के युवाओं को अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि परिणाम चाहिए। सरकार को यह साबित करना होगा कि गो-दिल्ली फाउंडेशन महज एक नई घोषणा नहीं है, बल्कि युवाओं के कारोबार, रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। उन्होंने कहा कि रोजगार के अवसर बढ़ाने और युवाओं को उद्यमी बनाने के लिए ऐसी योजनाओं का जमीन पर प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है। यदि सरकार पारदर्शी प्रक्रिया, आसान सहायता व्यवस्था, निवेशकों से संपर्क और बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करती है, तो इस पहल से युवाओं को लाभ मिल सकता है। लेकिन यदि इन आवश्यक पहलुओं पर पर्याप्त काम नहीं हुआ, तो योजना के अपेक्षित परिणाम हासिल करना कठिन हो सकता है। महेंद्र भास्कर के अनुसार, गो-दिल्ली फाउंडेशन की वास्तविक सफलता का फैसला 50 करोड़ रुपये के शुरुआती बजट या सरकारी घोषणाओं से नहीं, बल्कि इस बात से होगा कि दिल्ली के युवाओं को कितने ठोस अवसर मिलते हैं और उनके जीवन तथा रोजगार की स्थिति में कितना वास्तविक बदलाव आता है।





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