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Nepal Flood: नेपाल की विनाशकारी बाढ़ के बाद 275 भारतीय अब भी लापता, MEA बोला- चीन में अब कोई भारतीय नागरिक नहीं

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Nepal Flood: नेपाल की विनाशकारी बाढ़ के बाद 275 भारतीय अब भी लापता, MEA बोला- चीन में अब कोई भारतीय नागरिक नहीं

नई दिल्ली। नेपाल में पिछले महीने आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद लापता भारतीय नागरिकों की तलाश अब भी जारी है। भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक आपदा प्रभावित क्षेत्रों में गए 275 भारतीय नागरिकों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। भारत सरकार इन लोगों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए नेपाल के स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है। दूसरी ओर विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि चीन में अब कोई भारतीय नागरिक नहीं बचा है और वहां मौजूद सभी भारतीय आगे निकल चुके हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नेपाल में लापता भारतीयों को लेकर जानकारी साझा करते हुए बताया कि केंद्र सरकार इस मामले में कई स्तरों पर समन्वय कर रही है। नेपाल सरकार के संबंधित विभागों से संपर्क के साथ उन भारतीय राज्यों की सरकारों से भी जानकारी ली जा रही है, जहां से नागरिक नेपाल गए थे।

आपदा को कई दिन बीत जाने के बावजूद सैकड़ों भारतीयों के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं मिलने से उनके परिवारों की चिंता बढ़ती जा रही है। परिजन लगातार अपने रिश्तेदारों की सुरक्षित वापसी या उनके बारे में किसी आधिकारिक सूचना का इंतजार कर रहे हैं।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक आपदा प्रभावित क्षेत्रों से अब तक 166 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। बचाए गए सभी लोग सुरक्षित तरीके से अपने घर लौट चुके हैं। दूसरी तरफ लापता लोगों का पता लगाने के लिए काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास भी नेपाल की एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहा है।

चीन के रास्ते भारतीयों की आवाजाही को लेकर भी विदेश मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट की है। रणधीर जायसवाल के मुताबिक चीन के रास्ते कुल 1,907 भारतीय नागरिक नेपाल में प्रवेश कर चुके हैं। इसके बाद अब चीन में कोई भारतीय नागरिक शेष नहीं है।

चीन की ओर से पहले 49 भारतीय नागरिकों के लापता होने की सूचना दी गई थी। विदेश मंत्रालय ने बताया कि ये 49 लोग कोई अलग सूची का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि भारत की ओर से बताए गए कुल 275 लापता भारतीयों में ही शामिल हैं। इस तरह लापता भारतीय नागरिकों की कुल संख्या 275 ही है।

नेपाल में आई आपदा का दायरा बेहद व्यापक बताया जा रहा है। नेपाल सरकार की आपदा प्रबंधन एजेंसी NDRRMA के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में अब तक 1,287 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है।

इसके अलावा करीब 5,083 लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। लापता लोगों में नेपाल के नागरिकों के साथ बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी शामिल बताए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार लगभग 583 विदेशी नागरिक लापता लोगों की सूची में हैं।

नेपाल के कई जिले इस प्राकृतिक आपदा से गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। एजेंसी के मुताबिक चितवन, नवलपरासी, नुवाकोट और रसुवा जैसे जिलों से बड़ी संख्या में शव बरामद किए गए हैं। प्रभावित इलाकों में खोज एवं बचाव अभियान अभी भी जारी है।

बाढ़ के बाद कई स्थानों पर बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने के कारण बचाव टीमों के लिए दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। इसके बावजूद राहत एजेंसियां लगातार प्रभावित इलाकों में लोगों की तलाश कर रही हैं और अब तक हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा चुका है।

नेपाल में आई इस आपदा के बाद भारत भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग कर रहा है। भारत की ओर से नेपाल को राहत सामग्री और चिकित्सा सहायता भेजी जा रही है। इसके साथ विशेष बचाव टीमों को भी प्रभावित क्षेत्रों में भेजे जाने की जानकारी दी गई है।

काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास का विशेष ध्यान लापता भारतीय नागरिकों की खोज और उनकी पहचान से संबंधित जानकारी जुटाने पर है। नेपाल की एजेंसियों से मिलने वाली सूचनाओं का भारत में संबंधित राज्य सरकारों और परिवारों से उपलब्ध विवरण के साथ मिलान किया जा रहा है।

नेपाल की आपदा के बाद जलवायु परिवर्तन और इसके लिए विकसित देशों की जिम्मेदारी का मुद्दा भी सामने आया है। नेपाल की ओर से भारत, चीन और अमेरिका जैसे देशों से जलवायु परिवर्तन में योगदान के आधार पर मुआवजे की मांग किए जाने से संबंधित सवाल पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत का पक्ष रखा।

जायसवाल ने कहा कि नेपाल भारत का करीबी मित्र है और मौजूदा संकट के समय भारत का ध्यान उसे आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने पर है। भारत लगातार नेपाल को जरूरी मदद पहुंचाने का प्रयास कर रहा है और राहत तथा बचाव कार्यों में सहयोग जारी रखा जाएगा।

जलवायु परिवर्तन के सवाल पर विदेश मंत्रालय ने इसे किसी एक देश तक सीमित समस्या के बजाय वैश्विक चुनौती बताया। जायसवाल ने कहा कि भारत लंबे समय से इस बात पर जोर देता रहा है कि जलवायु परिवर्तन का प्रभावी मुकाबला सभी देशों के सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।

उन्होंने विकसित देशों की ऐतिहासिक जिम्मेदारी का भी उल्लेख किया। भारत का पक्ष है कि विकसित देशों ने ऐतिहासिक रूप से वैश्विक प्रदूषण और उत्सर्जन में अधिक योगदान दिया है, इसलिए उत्सर्जन कम करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के वैश्विक प्रयासों में उन्हें नेतृत्वकारी भूमिका निभानी चाहिए।

फिलहाल भारत के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता नेपाल में लापता 275 भारतीय नागरिकों का पता लगाना है। नेपाल की सरकारी एजेंसियों, भारतीय राज्यों और काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के बीच समन्वय के जरिए उनकी जानकारी जुटाने का प्रयास जारी है। वहीं आपदा प्रभावित नेपाल में राहत और बचाव अभियान के साथ भारत की सहायता भी जारी है।

 

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