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Graham Staines Case: दारा सिंह की सजा माफी पर सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा सरकार से मांगा फैसला, रिहाई की मांग पर छिड़ा विवाद

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Graham Staines Case: दारा सिंह की सजा माफी पर सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा सरकार से मांगा फैसला, रिहाई की मांग पर छिड़ा विवाद

नई दिल्ली। वर्ष 1999 के चर्चित ग्राहम स्टेंस हत्याकांड के मुख्य दोषी रबींद्र कुमार पाल उर्फ दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई और शेष सजा माफ किए जाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा सरकार से निर्णय लेने को कहा है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह 19 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई से पहले दारा सिंह की सजा माफी की याचिका पर अपना फैसला अदालत के सामने रखे।

दारा सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर अपनी शेष सजा माफ करने और समयपूर्व रिहाई की मांग की है। अदालत ने फिलहाल इस मामले में कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया है और कहा है कि पहले राज्य सरकार का सजा समीक्षा बोर्ड अपनी प्रक्रिया पूरी करे तथा सरकार इस पर निर्णय लेकर अदालत को अवगत कराए।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश के बाद मामला राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है। वामपंथी दलों सहित कई सामाजिक संगठनों ने दारा सिंह की संभावित रिहाई का विरोध करते हुए इसे गलत समय पर उठाया गया कदम बताया है। उनका कहना है कि सांप्रदायिक हिंसा जैसे जघन्य अपराध में दोषी व्यक्ति के प्रति नरमी न्याय व्यवस्था और संविधान के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।

यह मामला 22 जनवरी 1999 का है, जब ओडिशा के क्योंझर जिले के मनोहरपुर गांव में ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस और उनके दो बेटे फिलिप (10 वर्ष) तथा टिमोथी (6 वर्ष) एक धार्मिक शिविर से लौटने के बाद अपने वाहन में सो रहे थे। आरोप है कि दारा सिंह के नेतृत्व में एक भीड़ ने वाहन को घेरकर उसमें आग लगा दी, जिससे तीनों की जलकर मौत हो गई। इस घटना ने भारत ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक प्रतिक्रिया उत्पन्न की थी।

ग्राहम स्टेंस वर्ष 1965 में ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड से भारत आए थे और तीन दशकों से अधिक समय तक ओडिशा के मयूरभंज क्षेत्र में विशेष रूप से कुष्ठ रोगियों के बीच सामाजिक सेवा कार्य करते रहे। घटना के बाद उन पर धर्म परिवर्तन कराने के आरोप लगाए गए थे, लेकिन मामले की जांच के लिए गठित न्यायमूर्ति डी.पी. वाधवा आयोग को ऐसे आरोपों के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में सांप्रदायिक तनाव को इस हमले का प्रमुख कारण माना था।

दारा सिंह को वर्ष 2000 में गिरफ्तार किया गया था। वर्ष 2003 में निचली अदालत ने उन्हें फांसी की सजा सुनाई थी, जबकि कई अन्य आरोपियों को भी दोषी ठहराया गया था। बाद में 2005 में ओडिशा हाईकोर्ट ने उनकी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा और उम्रकैद की सजा को यथावत रहने दिया।

मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि ग्राहम स्टेंस की पत्नी ग्लैडिस स्टेंस ने सार्वजनिक रूप से अपने पति और दोनों बेटों के हत्यारों को माफ करने की घोषणा की थी। उन्होंने इस दुखद घटना के बावजूद ओडिशा में अपना सामाजिक सेवा कार्य जारी रखा। उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2005 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था।

दारा सिंह ने जुलाई 2024 में सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा था कि वह 25 वर्ष से अधिक समय जेल में बिता चुके हैं और जेल नियमों के तहत समयपूर्व रिहाई की नीति का लाभ पाने के पात्र हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपने किए पर पछतावा है और उन्होंने जेल में अच्छा आचरण बनाए रखा है। इसी मामले के सह-दोषी महेंद्र हेम्ब्रम को वर्ष 2025 में अच्छे व्यवहार के आधार पर समयपूर्व रिहा किया जा चुका है।

इस वर्ष मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा सरकार से दारा सिंह की याचिका पर छह सप्ताह के भीतर विचार करने को कहा था, लेकिन सरकार ने अतिरिक्त समय मांगा था। अब अदालत ने उम्मीद जताई है कि राज्य सरकार का सजा समीक्षा बोर्ड अपनी प्रक्रिया पूरी कर 19 अगस्त से पहले अंतिम निर्णय ले लेगा।

सूत्रों के अनुसार, ओडिशा सरकार के सजा समीक्षा बोर्ड ने हाल ही में उम्रकैद की सजा काट रहे कई कैदियों के मामलों की समीक्षा की है, लेकिन दारा सिंह के मामले में अंतिम निर्णय से पहले कुछ अतिरिक्त दस्तावेज मांगे गए हैं।

दूसरी ओर, सीपीआई और सीपीएम सहित कई संगठनों ने दारा सिंह की संभावित रिहाई का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि इतने गंभीर सांप्रदायिक अपराध के दोषी को रिहा करने से समाज में गलत संदेश जाएगा और सांप्रदायिक सद्भाव प्रभावित हो सकता है। वहीं कुछ ईसाई धार्मिक नेताओं का मत है कि दारा सिंह ने लंबी अवधि जेल में बिताई है और दया याचिका पर कानून के अनुसार विचार किया जाना चाहिए, जबकि अन्य चर्च नेताओं ने इसका विरोध किया है।

अब इस बहुचर्चित मामले में सभी की निगाहें ओडिशा सरकार के निर्णय पर टिकी हैं। सरकार के फैसले के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दारा सिंह को समयपूर्व रिहाई का लाभ मिलेगा या उन्हें शेष सजा भी पूरी करनी होगी।

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