Satyendar Jain Bail: दिल्ली जल बोर्ड भ्रष्टाचार मामले में सत्येंद्र जैन को जमानत, 2 लाख रुपये का बॉन्ड भरने का निर्देश
नई दिल्ली। दिल्ली जल बोर्ड (DJB) से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को अदालत से बड़ी राहत मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार को सत्येंद्र जैन की जमानत याचिका स्वीकार कर ली। विशेष न्यायाधीश दिग विनय सिंह ने संक्षिप्त मौखिक आदेश में जमानत आवेदन मंजूर करने का फैसला सुनाया। अदालत ने जैन को दो लाख रुपये के जमानती बॉन्ड और इतनी ही राशि के दो मुचलकों की शर्त पर जमानत दी है।
यह मामला दिल्ली जल बोर्ड से जुड़े एक कथित घोटाले और यूरोटेक एनवायर्नमेंटल प्राइवेट लिमिटेड को दिए गए कॉन्ट्रैक्ट से संबंधित है। एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने इस मामले में सत्येंद्र जैन को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद 19 अगस्त को अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। अब उनकी जमानत याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने उन्हें राहत दी है।
जिस समय संबंधित कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था, उस दौरान सत्येंद्र जैन दिल्ली सरकार में जल मंत्री थे। ACB का आरोप है कि कॉन्ट्रैक्ट देने की प्रक्रिया में टेंडर की शर्तों में बदलाव किया गया और टेंडर प्रक्रिया को इस तरह तकनीक आधारित बनाया गया, जिससे कथित तौर पर यूरोटेक एनवायर्नमेंटल प्राइवेट लिमिटेड को फायदा मिल सके।
ACB ने रोहिणी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी STP की क्षमता बढ़ाने के फैसले पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। एजेंसी का आरोप है कि सत्येंद्र जैन ने बिना किसी तकनीकी व्यवहार्यता अध्ययन के रोहिणी STP की क्षमता को 15 मिलियन गैलन प्रतिदिन से बढ़ाकर 30 MGD करने की मंजूरी दी। जांच एजेंसी के मुताबिक इस बदलाव के कारण परियोजना की लागत में करीब 123 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई।
जांच एजेंसी का आरोप है कि तकनीकी स्तर पर रोहिणी STP की क्षमता 15 MGD से बढ़ाकर 25 MGD करने का प्रस्ताव था, लेकिन तत्कालीन मंत्री के स्तर पर इसमें बदलाव किया गया और इसे 30 MGD तक बढ़ाने की मंजूरी दी गई। ACB का दावा है कि इस बदलाव के समर्थन में कोई तकनीकी सिफारिश या व्यवहार्यता अध्ययन मौजूद नहीं था।
ACB ने मामले में कथित तौर पर पैसों के लेन-देन से जुड़े साक्ष्य मिलने का दावा भी किया है। एजेंसी के अनुसार, कथित कमीशन की रकम बिचौलियों के माध्यम से अलग-अलग आरोपियों के बैंक खातों तक पहुंचाई गई थी। जांच एजेंसी इस वित्तीय लेन-देन और टेंडर प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है।
इस मामले की शुरुआत मई 2024 में डायरेक्टरेट ऑफ विजिलेंस की शिकायत के आधार पर दर्ज किए गए केस से हुई थी। शिकायत में दिल्ली जल बोर्ड द्वारा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता बढ़ाने और अपग्रेड करने की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था। इसमें टेंडर की शर्तों में हेरफेर और आपराधिक साजिश जैसे आरोप भी शामिल थे।
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सत्येंद्र जैन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन पेश हुए। उनके साथ अधिवक्ता विवेक जैन भी मौजूद रहे। बचाव पक्ष ने सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी के समय और उसकी आवश्यकता को लेकर सवाल उठाए।
बचाव पक्ष ने अदालत के सामने दलील दी कि मई 2024 में FIR दर्ज होने के करीब 27 महीने बाद ACB ने सत्येंद्र जैन को गिरफ्तार किया। वरिष्ठ अधिवक्ता हरिहरन ने कहा कि जैन जांच में सहयोग करते रहे थे और ऐसे में उन्हें गिरफ्तार करने की आवश्यकता नहीं थी। बचाव पक्ष का कहना था कि लंबे समय से चल रही जांच के बाद अचानक गिरफ्तारी का कोई पर्याप्त आधार नहीं था।
सत्येंद्र जैन की ओर से यह भी कहा गया कि ACB ने प्रवर्तन निदेशालय की ओर से दी गई जानकारी के आधार पर FIR दर्ज की थी। बचाव पक्ष ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले का हवाला देते हुए दावा किया कि जैन का कथित अपराध से हुई कमाई से कोई संबंध स्थापित नहीं हुआ है।
रोहिणी STP की क्षमता बढ़ाए जाने के मुद्दे पर भी बचाव पक्ष ने ACB के आरोपों को चुनौती दी। वरिष्ठ अधिवक्ता हरिहरन ने अदालत में कहा कि STP की क्षमता को 15 MGD से बढ़ाकर 25 MGD करने का फैसला एक तकनीकी समिति की सिफारिश पर आधारित था। उन्होंने कहा कि प्लांट की अधिकतम क्षमता 30 MGD तक थी।
बचाव पक्ष ने इस पूरे मामले को नीतिगत निर्णय से जुड़ा हुआ बताते हुए तर्क दिया कि सरकार में मंत्री के तौर पर लिए गए नीतिगत फैसलों को आपराधिक मामले के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि अदालतों से सामान्य तौर पर नीतिगत निर्णयों के क्षेत्र में हस्तक्षेप न करने की अपेक्षा की जाती है, जब तक कि किसी आपराधिक कृत्य के स्पष्ट प्रमाण सामने न हों।
जैन की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि उनके देश छोड़कर भागने की कोई आशंका नहीं है। बचाव पक्ष ने कहा कि अदालत आवश्यक शर्तें लगाकर जांच और सुनवाई के दौरान उनकी मौजूदगी सुनिश्चित कर सकती है। इसके साथ ही ED से जुड़े मामले का उल्लेख करते हुए कहा गया कि उस मामले में किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।
दूसरी ओर ACB ने सत्येंद्र जैन की जमानत याचिका का विरोध किया। जांच एजेंसी की ओर से पब्लिक प्रॉसिक्यूटर मनीष रावत ने अदालत में कहा कि मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है और आरोपी के खिलाफ साक्ष्य मौजूद हैं। अभियोजन पक्ष ने जैन पर जांच में सहयोग नहीं करने का भी आरोप लगाया।
ACB की इस दलील पर बचाव पक्ष ने सवाल उठाया। वरिष्ठ अधिवक्ता हरिहरन ने कहा कि मई 2024 से चल रही जांच को अब शुरुआती चरण में नहीं माना जा सकता। उनका तर्क था कि जांच एजेंसी के पास मामले की जांच करने के लिए पर्याप्त समय था और सत्येंद्र जैन भी जांच प्रक्रिया में उपलब्ध रहे हैं।
मामले में अभियोजन और बचाव पक्ष के बीच सबसे महत्वपूर्ण विवाद रोहिणी STP की क्षमता बढ़ाने के फैसले को लेकर है। ACB का आरोप है कि तकनीकी प्रस्ताव में क्षमता 15 MGD से बढ़ाकर 25 MGD करने की बात थी, लेकिन तत्कालीन मंत्री ने कथित तौर पर इसमें बदलाव कर बिना तकनीकी सिफारिश या व्यवहार्यता अध्ययन के इसे 30 MGD तक बढ़ाने की मंजूरी दे दी। वहीं बचाव पक्ष इसे तकनीकी समिति की सिफारिशों और नीतिगत निर्णय से जुड़ा मामला बता रहा है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद राउज एवेन्यू कोर्ट ने सत्येंद्र जैन की जमानत याचिका स्वीकार कर ली। अदालत ने उन्हें दो लाख रुपये का जमानती बॉन्ड और इतनी ही राशि के दो मुचलके जमा करने की शर्त पर जमानत दी है। हालांकि जमानत मिलने का अर्थ मामले में आरोपों से बरी होना नहीं है और कथित दिल्ली जल बोर्ड भ्रष्टाचार मामले की जांच तथा आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
